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(Government Girls Degree College), डी.एल.डब्ल्यू, वाराणसी

Recognized u/s 2(f) and 12B of University Grants Commission Act, 1956

Affilliated to Mahatma Gandhi Kashi Vidyapith, Varanasi

Principal's Desk

शिक्षा जीवन का सबसे महत्वपूर्ण बिन्दु है। व्यक्ति के सम्पूर्ण चरित्र-विकास एवं सामाजिक उत्कर्ष में शिक्षा का अत्यन्त महत्त्वपूर्ण स्थान है। सम्पूर्ण विश्व के लिए ज्ञान की उपयोगिता सर्वविदित है ऐसे में यह आवश्यक हो जाता है कि समाज की आधी आबादी जिसका समाज के निर्माण व विकास में मेरुदण्ड सा स्थान है, उसकी शिक्षा पर, ज्ञान पर मजबूत पकड़ हो। शिक्षा अन्याय को रोकने एवं उसे समाप्ति की ओर पहुँचाने वाला अस्त्र है। ज्ञान हमें विश्व पटल पर एकभाव से एकमंच पर खड़े होने की आधार-भूमि देता है। शिक्षा नवोन्नमेष के रास्ते खोलती है, हमें विकास की ओर ले जाती है। हमारी युवा पीढ़ी नये विकास का स्तम्भ है और शिक्षा उसे मजबूती प्रदान करने का कार्य करती है। अतएव मैं अपनी युवा पीढ़ी से अपेक्षा रखती हूँ कि वो इस प्रतिस्पर्धी युग में स्वयं को अपनी मेहनत एवं लगन से प्रतिस्पर्धा के योग्य बनायें और गायें जीवन का विजय गीत।

वर्तमान समय में शिक्षा धन की पोटली में बन्द होती जा रही है। समाज के निम्न आय वर्ग के लिए शिक्षित होना एक दुरूह कार्य होता जा रहा है ऐसे में यह महाविद्यालय शिक्षा के साथ बालिकाओं में जीवन मूल्यों का आधान एवं अनुशासित जीवन शैली का विकास करता है। इसी दिशा में मैं पत्रिका के माध्यम से अभिभावकों से भी यह अपील करना चाहती हूँ कि परिवार बच्चों की प्रथम पाठशाला है अत: वे अपने बच्चों में अनुशासन का ऐसा बीज डालें कि वो हमारे संरक्षण में परिवर्धित होकर एक वृक्ष का रूप धारण कर सकें।

स्त्री शिक्षा के उन्नयन की दिशा में शहरी तथा ग्रामीण इलाकों में राजकीय महाविद्यालयों की शृंखला अपनी महती भूमिका निभा रही है। इसी क्रम में राजकीय महिला महाविद्यालय स्त्री शिक्षा के क्षेत्र में एक मानक महाविद्यालय के रूप में कार्य करते हुए समाज की गरीब, निर्धन एवं शिक्षा के प्रति रुचि रखने वाली बालिकाओं के व्यक्तित्व निर्माण का कार्य कर रहा है महाविद्यालय केवल पुस्तकस्थ विद्या का प्रसार स्थल नहीं होता अपितु व्यक्ति के व्यक्तित्त्व निर्माण के प्रति उत्तरदायी होता। महाविद्यालय की छात्राओं में विविध प्रतिभायें छुपी होती हैं। समय-समय पर महाविद्यालय एवं अन्तर-महाविद्यालय तथा विश्वविद्यालय स्तर पर इन प्रतिभाओं और गुणों को निखर कर सामने आने का मौका मिलता है। इसी क्रम में छात्राओं की लेखन प्रतिभा उभर कर आपके सामने आ सके अत: महाविद्यालयीय पत्रिका का प्रकाशन किया जा रहा है।हमारे महाविद्यालय के शिक्षकों की भूमिका एक कुम्हार के जैसी है। हर वर्ष इनके सामने विद्यार्थी के रूप में एक नयी मिट्टी होती है जिसे ये अपने हाथों से सुन्दर पात्र का रूप देते हैं और उसमें ज्ञान का दीप जलाते हैं। उनकी ना ना विध जिज्ञासाओं को शान्त करते हैं। उनके अन्दर स्थित अलग-अलग गुणों को, प्रतिभाओं को पहचान कर उनको उस क्षेत्र के लिए तैयार करते हैं जिसमें जाकर हमारे विद्यार्थी अपना उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकें और अपना, अपने परिवार का और देश का नाम रौशन कर सकें।

मैं उक्त अवसर पर महाविद्यालय की छात्राओं को, अपने महाविद्यालय परिवार के समस्त सदस्यों को हार्दिक बधाई देती हूँ और छात्राओं की निरन्तर उन्नति और प्रगति की कामना करती हूँ। आशा ही समस्त दिशाओं को प्रकाशित करती है। छात्राओं के जीवन में सदैव ज्ञान-प्रकाश पैâलता रहे, आशा की किरण चमकती रहे और वे नव-पथ पर चलती रहें-ऐसी मेरी कामना है।

डॉ० सुधा पांडे
प्राचार्या

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